बिहार को शराबबंदी से ₹20,000 करोड़ का नुकसान, क्या हटेगी पाबंदी? CM सम्राट चौधरी ने कर दिया बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शराबबंदी जारी रखने का ऐलान किया, साथ ही 2030 तक पलायन रोकने और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने की योजना बताई।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज शराबबंदी को जारी रखने का स्पष्ट ऐलान किया। उन्होंने इस घोषणा के साथ सरकार के कई प्रमुख लक्ष्यों को भी उजागर किया, जिनमें रोजगार सृजन, अपराध में कमी, 2030 तक पलायन को रोकना और राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी के कारण राज्य को अनुमानित रूप से ₹20,000 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा राज्य के वित्तीय परिप्रेक्ष्य में इस नीति के प्रभाव को दर्शाता है, परंतु उन्होंने यह भी बताया कि सामाजिक और आर्थिक लाभों को देखते हुए यह कदम जारी रखना आवश्यक है।
चौधरी ने बताया कि शराबबंदी के बाद रोजगार के अवसरों में वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि शराब के व्यापार से जुड़े कई अनौपचारिक कार्यस्थलों की जगह वैध उद्योगों, विशेषकर कृषि-आधारित उद्योगों, ने ले ली है। इस दिशा में 25 चीनी मिलों की स्थापना एक प्रमुख कदम माना गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में नई नौकरियां सृजित होंगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
अपराध दर में कमी भी सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब की उपलब्धता घटने से सामाजिक बुराइयों में कमी आई है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार हुआ है। इस संदर्भ में उन्होंने 2030 तक पलायन को रोकने की दीर्घकालिक योजना का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य युवा वर्ग को रोजगार के अवसर प्रदान करके राज्य से बाहर प्रवास को कम करना है।
शराबबंदी के पक्ष में इन बिंदुओं को उजागर करने के बाद, मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में निरंतर काम करती रहेगी और सभी संबंधित विभागों को इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समन्वय करने का निर्देश दिया गया है।
वर्तमान में यह घोषणा राज्य में शराबबंदी के भविष्य को लेकर चर्चा को और तेज कर रही है। जबकि कुछ वर्गों ने आर्थिक नुकसान के आंकड़ों को लेकर सवाल उठाए हैं, सरकार का कहना है कि सामाजिक लाभ और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य इस नीति को जारी रखने के मुख्य कारण हैं।
सम्राट चौधरी का यह बड़ा ऐलान बिहार में शराबबंदी के भविष्य को स्पष्ट रूप से निर्धारित करता है और साथ ही राज्य की आर्थिक व सामाजिक दिशा-निर्देशों को भी रेखांकित करता है।
