1.70 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति, 5 ठिकानों पर एक साथ रेड! बिहार के इस अधिकारी पर बड़ी कार्रवाई
दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के BDO आनंद कुमार विभूति के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने पाँच स्थानों पर छापेमारी की, 1.70 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति के मामले में जांच जारी।
दरभंगा, बिहार – आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) आनंद कुमार विभूति के खिलाफ एक समन्वित कार्रवाई की। रिपोर्टों के अनुसार, EOU ने एक ही दिन में पाँच अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें अधिकारी की आय से अधिक, लगभग 1.70 करोड़ रुपये की संपत्ति के आरोपों की जांच का विस्तार किया गया है।
आनंद कुमार विभूति, जो बहादुरपुर प्रखंड के प्रशासनिक प्रमुख हैं, पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने आधिकारिक आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। इस मामले को “असमान्य संपत्ति” (disproportionate assets) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और राज्य स्तर पर सार्वजनिक पदधारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार विरोधी उपायों के तहत आती है।
EOU, जो बिहार पुलिस का आर्थिक अपराधों से निपटने वाला विशेष विभाग है, ने इस मामले में विस्तृत जाँच शुरू की है। छापेमारी के दौरान, अधिकारी के घर, कार्यालय और अन्य संभावित संपत्ति के स्थानों की तलाशी ली गई। छापेमारी के बाद, EOU ने कहा कि सभी प्राप्त साक्ष्य और दस्तावेज़ों की आगे की जांच जारी रहेगी।
वर्तमान में, जांच का दायरा केवल दरभंगा तक सीमित नहीं है; मुजफ्फरपुर में भी समान संपत्ति असंगतता के संबंध में जांच चल रही है। यह संकेत देता है कि संभावित रूप से अधिकारी की संपत्ति के स्रोतों की व्यापक जाँच की जा रही है, जिसमें विभिन्न जिलों में स्थित संपत्तियों की सत्यता की पुष्टि शामिल है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से, इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य सार्वजनिक पदधारियों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़ी नीति अपनाई है, जिसमें उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
जाँच के परिणाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में कोई कानूनी कार्यवाही या अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि सभी साक्ष्य एकत्रित होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच, स्थानीय जनता और मीडिया ने इस मामले पर गहरी रुचि दिखाई है, क्योंकि यह सार्वजनिक पदधारियों के बीच संपत्ति असंगतता के मुद्दे को उजागर करता है। यदि आगे की जाँच में यह सिद्ध होता है कि अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करके अवैध संपत्ति अर्जित की है, तो यह केस अन्य समान मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।
वर्तमान में, यह मामला “विकासशील” (developing) के रूप में वर्गीकृत है, और आगे की जानकारी के साथ अपडेट प्रदान किया जाएगा।
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(यह लेख उपलब्ध स्रोतों में प्रकाशित तथ्यों पर आधारित है; कोई भी अतिरिक्त विवरण अभी तक पुष्टि नहीं हुआ है।)
