Bihar Flood: बाढ़ से फिर बेहाल हुआ बिहार, 18 जिलों में हालत खराब, तेजस्वी यादव बोले- एयरफोर्स की मदद ले सरकार
बिहार में 18 जिलों में बाढ़ ने 6.65 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया, पटना में गंगा ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
बिहार में लगातार बढ़ती जलधारा ने 18 जिलों में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है। राज्य के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6.65 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। इस आपदा के प्रमुख कारणों में गंगा नदी का जल स्तर शामिल है, जिसने पटना में पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक स्तर दर्ज किया है। गंगा के इस असामान्य उछाल ने न केवल शहर के बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया, बल्कि कई क्षेत्रों में आवासीय और कृषि क्षति भी बढ़ा दी है।
पटना में गंगा का जल स्तर पिछले दशक के रिकॉर्ड को तोड़ते ही, कई प्रमुख सड़कों और पुलों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत कार्यों के लिए विभिन्न एजेंसियों को तैनात किया है, जबकि प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि, विस्तृत आंकड़े और राहत कार्यों की प्रगति अभी भी विकसित हो रही है, इसलिए स्थिति को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
गंगा के अलावा, पुनपुन नदी का उफान भी इस बाढ़ में एक महत्वपूर्ण कारक बन गया है। पुनपुन के जल स्तर में तेज वृद्धि ने कई रेल मार्गों को बाधित कर दिया, जिससे ट्रेन रूट में बदलाव करना पड़ा। रेलवे विभाग ने सुरक्षा कारणों से कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द या पुनर्निर्देशित किया है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इन परिवर्तनों के कारण स्थानीय परिवहन नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है और लोगों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ रही है।
बिहार में बाढ़ का इतिहास लंबा है, और हर वर्ष मानसून के दौरान जलस्रोतों का स्तर बढ़ता रहता है। इस वर्ष की बाढ़ ने विशेष रूप से गंगा और पुनपुन दोनों नदियों के जल स्तर में असामान्य वृद्धि को उजागर किया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन और अपर्याप्त जल प्रबंधन प्रणाली इस तरह की आपदाओं की आवृत्ति को बढ़ा सकते हैं, लेकिन इस संबंध में विस्तृत अध्ययन अभी जारी है।
वर्तमान में राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन के तहत विभिन्न राहत उपायों को लागू किया है। जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंप और बाढ़ रोकथाम के लिए बंधक निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहे हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित रोगों के प्रसार को रोकने के लिए टीकाकरण और स्वच्छता अभियानों को बढ़ाया है। इन प्रयासों के बावजूद, कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अभी भी जल स्तर उच्च बना हुआ है, जिससे आगे की क्षति की संभावना बनी हुई है।
बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए कई गैर‑सरकारी संगठनों और स्वयंसेवकों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। वे भोजन, कपड़े और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री वितरित कर रहे हैं। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी है, जिसमें जल में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शामिल है।
स्थिति को लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर निगरानी की जा रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आगामी कुछ दिनों में भी जल स्तर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, जिससे अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इस बीच, प्रभावित जनसंख्या को सुरक्षित रहने, उच्च स्थानों पर शरण लेने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
