गुरुवार, 8 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी रहा। यह प्रदर्शन दिल्ली के राजघाट क्षेत्र में आयोजित हुआ, जहाँ राहुल गांधी और प्रियांका गांधी ने प्रमुख भूमिका निभाई। विरोध का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठाए गए प्रश्नों को उजागर करना तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे चुनाव आयोग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से SIR प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त की, जिसे वे मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए एक विशेष कदम मानते हैं, परन्तु इसके कार्यान्वयन में संभावित त्रुटियों और पक्षपात की संभावना को लेकर सवाल उठाए। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि इन प्रक्रियाओं में सुधार नहीं किया गया तो चुनावों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने भी सभा में कहा कि “हम एक निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया की माँग कर रहे हैं, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले।” प्रियांका गांधी ने इस बात को दोहराते हुए कहा कि “वोटर लिस्ट में सुधार के लिए SIR प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना आवश्यक है।” दोनों ने यह भी उल्लेख किया कि यदि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो वे आगे भी सार्वजनिक दबाव बनाते रहेंगे।
प्रदर्शन के दौरान बापू (महात्मा गांधी) को भी श्रद्धांजलि दी गई। उपस्थित लोगों ने गांधी जी की तस्वीर के सामने फूल रखे और शांति एवं सत्य के मूल्यों को याद किया। यह श्रद्धांजलि प्रदर्शन के भावनात्मक स्वर को दर्शाती है, जहाँ आधुनिक लोकतांत्रिक चुनौतियों के बीच गांधी जी के सिद्धांतों को पुनः स्थापित करने की इच्छा स्पष्ट थी।
प्रदर्शन के बाद, स्थानीय प्रशासन ने बताया कि रात 10 बजे तक राजघाट के कुछ मुख्य रास्ते बंद रहेंगे, जिससे ट्रैफ़िक पर असर पड़ेगा। सुरक्षा कारणों से इस बंदी को लागू किया गया, और नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने का निर्देश दिया गया। पुलिस ने भी यह कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रूप से चल रहा है और किसी भी प्रकार की हिंसा या तोड़‑फोड़ की कोई सूचना नहीं मिली है।
यह तीसरा दिन का विरोध प्रदर्शन, पहले दो दिनों के निरंतर प्रदर्शन के बाद आया, जहाँ भी समान मांगें रखी गई थीं। पहले दो दिनों में भी विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। इस बार का प्रदर्शन अधिक संगठित और बड़े पैमाने पर आयोजित किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर दृढ़ संकल्पित है।
वर्तमान में यह मामला विकसित हो रहा है। यदि चुनाव आयोग इस पर प्रतिक्रिया देता है या ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र के भविष्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन सकता है। विपक्षी दलों ने कहा कि वे आगे भी इस मुद्दे को सार्वजनिक मंच पर उठाते रहेंगे और आवश्यकतानुसार कानूनी उपायों का सहारा लेंगे।
समग्र रूप से, राहुल‑प्रियांका द्वारा नेतृत्व किया गया यह तीसरा दिन का विरोध प्रदर्शन, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची के अद्यतन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफे की मांग को लेकर एक स्पष्ट संदेश देता है। यह घटना भारतीय राजनीति में चुनाव सुधार के मुद्दे को फिर से प्रमुखता से सामने लाने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
