मुजफ्फरपुर, बिहार – आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आज सुबह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नारद कुमार दास के ससुराल स्थित फ्लैट पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम ने राधिका अपार्टमेंट, नया टोला में स्थित इस फ्लैट से 51.50 लाख रुपये नकद बरामद किए।
EOU ने यह कार्रवाई “आय से अधिक संपत्ति” के आरोप के तहत की, जो भारतीय कानून के तहत एक गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है। एजेंसी ने बताया कि यह छापेमारी पाँच अलग-अलग ठिकानों पर समन्वित रूप से की गई, जिसमें दास जी के व्यक्तिगत आवासीय परिसर के साथ-साथ उनके ससुराल के फ्लैट को भी शामिल किया गया।
नरद कुमार दास, जो वर्तमान में बिहार सरकार के सार्वजनिक कार्य विभाग में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, को इस समय तक इस मामले में कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया है। दास जी की नियुक्ति और कार्यकाल के बारे में सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है, परन्तु इस छापेमारी से पहले उनकी संपत्ति या आय से संबंधित कोई आधिकारिक जांच नहीं हुई थी।
आर्थिक अपराध इकाई ने बताया कि छापेमारी के दौरान बरामद की गई नकद राशि के अलावा कोई अन्य अवैध संपत्ति, दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं मिले। एजेंसी ने यह भी कहा कि बरामद की गई राशि का स्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं है और आगे की जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि यह आय से अधिक संपत्ति के आरोप को सिद्ध करता है या नहीं।
बिहार सरकार ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है, जबकि राज्य के कई अन्य विभागों में समान “आय से अधिक संपत्ति” मामलों की जांच चल रही है। इस प्रकार की जांचें आमतौर पर तब शुरू होती हैं जब किसी सरकारी अधिकारी की आय और उनके द्वारा घोषित संपत्ति के बीच असंगति पाई जाती है।
स्थानीय पुलिस ने भी छापेमारी के बाद मामले को ईओयू को सौंप दिया है, और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज़ तैयार किए जा रहे हैं। यदि दास जी के खिलाफ आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित किया जा सकता है, जिसमें जुर्माना, संपत्ति की जब्ती और जेल की सजा शामिल हो सकती है।
यह घटना बिहार में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराधों की जांच में एक नया मोड़ दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ समान मामलों में छापेमारी और संपत्ति की जब्ती हुई है, जिससे सार्वजनिक भरोसे को लेकर सवाल उठे हैं।
वर्तमान में यह मामला “विकासशील” माना गया है; अर्थात् आगे की जांच के परिणाम और संभावित कानूनी कार्यवाही अभी तय नहीं हुई है। एजेंसी ने कहा कि आगे की सुनवाई और संभावित कोर्ट केस के बारे में जानकारी मिलने पर सार्वजनिक रूप से अपडेट किया जाएगा।
इस घटना ने स्थानीय नागरिकों और मीडिया में चर्चा को जन्म दिया है, जहाँ कई लोग सरकारी अधिकारियों की पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। अभी के लिए, नारद कुमार दास के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है और इस पर आगे की रिपोर्टें उपलब्ध होती रहेंगी।
