बिहार सरकार ने अपने ऊर्जा विभाग के माध्यम से बिहार ऊर्जा नियामक आयोग (BERC) को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें नेट मीटरिंग के तहत स्थापित अतिरिक्त रूफटॉप सोलर सिस्टम से उत्पन्न बची हुई बिजली के लिए वर्ष‑अंत में क्रेडिट प्रदान करने की माँग की गई है। यह प्रस्ताव, यदि स्वीकृत हो जाता है, तो उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ देगा और साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को अतिरिक्त समर्थन प्रदान करेगा।
नेट मीटरिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें घर या व्यवसाय द्वारा स्थापित सौर पैनल से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जाता है और उसके बदले में उपभोक्ता को उसी मात्रा में क्रेडिट मिलता है। वर्तमान में कई राज्यों में इस व्यवस्था को लागू किया गया है, परंतु अधिकांश मामलों में क्रेडिट तुरंत या मासिक आधार पर दिया जाता है। बिहार में प्रस्तावित परिवर्तन के अनुसार, वर्ष‑अंत में बची हुई अतिरिक्त बिजली के लिए एकत्रित क्रेडिट को एकत्रित किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को एक बड़े पैमाने पर लाभ मिल सकेगा।
ऊर्जा विभाग ने इस प्रस्ताव को तैयार करते समय दो प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखा है। पहला, सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना और ग्रिड पर लोड को कम करना, जिससे ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो सके। दूसरा, पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सौर पंप और अन्य कृषि‑उपकरणों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना, जिससे कृषि उत्पादन में स्थिरता आए।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता अपने रूफटॉप सोलर सिस्टम से वर्ष‑अंत तक अधिक बिजली उत्पन्न करता है, तो वह अतिरिक्त मात्रा को क्रेडिट के रूप में प्राप्त करेगा, जिसे वह अगले बिलिंग चक्र में उपयोग कर सकेगा। इस व्यवस्था से न केवल सौर ऊर्जा निवेश पर रिटर्न तेज़ होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को ऊर्जा लागत में कमी का भी अनुभव होगा।
बिहार में सौर ऊर्जा के विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य ने पहले भी विभिन्न नीतियों को लागू किया है, जैसे कि सौर पैनल की इंस्टॉलेशन पर सब्सिडी और आसान ऋण सुविधा। इस नई क्रेडिट प्रस्ताव को जोड़कर, सरकार का लक्ष्य सौर ऊर्जा को अधिक आकर्षक बनाना और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के अपनाने की गति को तेज़ करना है।
हालांकि प्रस्ताव अभी तक BERC द्वारा अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन ऊर्जा विभाग ने कहा है कि यह पहल राज्य के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य के साथ संरेखित है और इसे शीघ्र स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह बिहार में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा और उपभोक्ताओं तथा किसानों दोनों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करेगा।
