बिहार के बांका जिले में मंडार पर्वत के पास रिकॉर्ड किया गया एक पुराना वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर तेज़ी से वायरल हुआ। वीडियो में एक नाबालिग लड़की के साथ अभद्र भाषा और शारीरिक मारपीट की घटनाएँ दिखाई गई हैं। इस वीडियो को देखते ही स्थानीय जनता ने इसे व्यापक रूप से साझा किया, जिससे यह कई शहरों और राज्यों में चर्चा का विषय बन गया।
पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। बंधु पुलिस ने वीडियो में दिखाए गए छह अज्ञात युवकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की है। FIR में बताया गया है कि वीडियो में दिखाए गए कृत्य नाबालिग के खिलाफ शारीरिक और मौखिक अत्याचार के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (स्त्री के विरुद्ध अपमानजनक व्यवहार) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66A (ऑनलाइन अभद्रता) के तहत दंडनीय हैं।
पुलिस ने कहा कि वीडियो की प्रामाणिकता और घटना के वास्तविक समय को स्थापित करने के लिए फोरेंसिक जांच चल रही है। अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, क्योंकि पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। जांच में वीडियो के मूल स्रोत, अपलोड करने वाले व्यक्ति और संभावित गवाहों से पूछताछ शामिल है।
यह घटना बांका में हाल ही में हुई नाबालिग के खिलाफ हिंसा के मामलों में एक नया जोड़ है। पिछले महीने, जमुई जिले में भी एक समान वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें नाबालिग पर अत्याचार की तस्वीरें दिखी थीं। दोनों मामलों में सामाजिक मीडिया पर तेज़ी से फैलाव और सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने पुलिस को त्वरित कार्यवाही करने के लिए प्रेरित किया।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे वीडियो को बिना सत्यापन के साझा न करें और यदि ऐसे किसी भी सामग्री को देखें तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचित करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा या अभद्रता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।
सामाजिक मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद, कई उपयोगकर्ताओं ने इस पर निंदा व्यक्त की और नाबालिग के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की। महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी कर, नाबालिगों के खिलाफ किसी भी प्रकार के शोषण या हिंसा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा, इसका आश्वासन दिया।
वर्तमान में, पुलिस द्वारा की जा रही जांच के परिणामों की प्रतीक्षा है। यदि जांच में आरोपी की पहचान हो जाती है, तो उन्हें भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा के तहत दंडित किया जाएगा। इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए स्कूलों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई है।
यह मामला नाबालिगों के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामलों को उजागर करता है और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। पुलिस और सामाजिक संगठनों की संयुक्त कोशिशें इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
