एयर फोर्स के जांबाज पायलट, जो बने दो-दो राष्ट्रपतियों के ADC, 1965 और 71 के युद्ध में पाकिस्तान के उड़ाए होश!
1953 में वायुसेना में शामिल हुए एयर मार्शल मन मोहन सिन्हा ने 1965‑71 के युद्धों में वीरता दिखाई और दो राष्ट्रपति के व्यक्तिगत सहायक (ADC) के रूप में कार्य किया।
एयर मार्शल मन मोहन सिन्हा (रस्टि) का करियर भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के इतिहास में एक उल्लेखनीय अध्याय के रूप में दर्ज है। उन्होंने 1953 में वायुसेना में प्रवेश किया और तब से लेकर अपने रिटायरमेंट तक विभिन्न प्रमुख पदों पर कार्य किया। सिन्हा को विशेष रूप से दो प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की भूमिकाएँ मिलीं: वह दो अलग‑अलग काल में भारत के राष्ट्रपति के व्यक्तिगत सहायक (एडवांस्ड डिप्लोमा कोऑर्डिनेटर, ADC) रहे। यह नियुक्ति उनके पेशेवर प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत विश्वसनीयता को दर्शाती है।
सिन्हा की सैन्य सेवा का सबसे उल्लेखनीय पहलू 1965 और 1971 के भारत‑पाकिस्तान युद्धों में उनका योगदान है। दोनों संघर्षों में उन्होंने अपने पायलट कौशल और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। 1965 के युद्ध में, जब भारतीय वायुसेना को कई चुनौतीपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करना था, सिन्हा ने कई हवाई अभियानों में भाग लिया। उसी प्रकार, 1971 के युद्ध में भी उन्होंने रणनीतिक महत्व के ऑपरेशनों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे भारतीय वायुसेना की प्रभावशीलता में वृद्धि हुई।
इन युद्धों के दौरान उनके द्वारा किए गए कार्यों को कई बार “वीरता” के रूप में सराहा गया, हालांकि उपलब्ध स्रोतों में विशिष्ट मिशन विवरण या व्यक्तिगत पुरस्कारों का उल्लेख नहीं है। उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि कैसे एक पायलट से शुरू होकर वह राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका तक पहुँच सकता है।
वायुसेना में उनके शुरुआती वर्षों में, सिन्हा ने विभिन्न प्रकार के विमान संचालित किए और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया। उनका अनुभव नई पीढ़ी के पायलटों के प्रशिक्षण में भी उपयोगी रहा, जिससे भारतीय वायुसेना की क्षमताओं में दीर्घकालिक सुधार संभव हुआ।
राष्ट्रपति के ADC के रूप में उनकी सेवा दो अलग‑अलग राष्ट्रपति कार्यकालों में हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न राजनीतिक परिवेशों में भी उनका पेशेवर भरोसा बना रहा। इस पद पर वह राष्ट्रपति के शेड्यूल, सुरक्षा और आधिकारिक समारोहों के समन्वय में मुख्य भूमिका निभाते थे, जिससे राष्ट्रपति कार्यालय की कार्यक्षमता में योगदान मिला।
आज, एयर मार्शल मन मोहन सिन्हा को भारतीय वायुसेना के इतिहास में एक सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। उनका जीवन यात्रा 1953 में भर्ती से लेकर दो राष्ट्रपतियों के ADC और दो प्रमुख युद्धों में भागीदारी तक, भारतीय रक्षा क्षेत्र में समर्पण और साहस का प्रतीक बनी हुई है।
(नोट: उपर्युक्त विवरण स्रोत‑रिपोर्टेड तथ्यों पर आधारित हैं; व्यक्तिगत उद्धरण या अतिरिक्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।)
