फणीश्वर नाथ रेणु जयंती

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“ मैला आंचल ”और फणीश्वर नाथ रेणु

 

आज 4 मार्च यानी फणीश्वर नाथ रेणु जयंती है तो उनसे जुड़ी कुछ बातें आप लोगों के साथ साझा करते हैं।

फणीश्वर नाथ की जीवनी
फणीश्वर नाथ

फणीश्वर नाथ रेणु हिंदी भाषा के एक अहम साहित्यकार जिसे शायद ही कोई ना जानता हो जिनके पहले उपन्यास “मैला आंचल” जो की बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध हुई, जिसके लिए इनको पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। फणीश्वर नाथ रेणु को जितनी प्रसिद्धि हिंदी साहित्य में उनके पहले उपन्यास “मैला आंचल ”जो कि 1954 में प्रकाशित हुई थी उससे मिली उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है ।इस उपन्यास के प्रकाशित होते ही उन्हें रातोंरात हिंदी साहित्य के एक बड़े कथाकार के तौर पर प्रसिद्ध कर दिया। हालांकि कुछ लोगों ने इसे प्रेमचंद के उपन्यास “गोदान ”के बाद इसे हिंदी साहित्य का दूसरा सबसे बेहतरीन उपन्यास घोषित करने में देर ना की । उनकी प्रसिद्धि से जलने वालों ने विवाद भी कम पैदा नहीं किया किसी ने इसे सतीनाथ भादुरी के बंगला उपन्यास “धोधाई चरित मानस ”की नकल बताने की कोशिश की तो किसी ने कुछ ,पर वक्त के साथ इस तरह के झूठे आरोप ठंडे पढ़ते गए ।

“मैला आंचल ”कथा का नायक एक युवा डॉक्टर है, जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक पिछड़े गांव को अपने लिए कार्य क्षेत्र के रूप में चुनता है और इसी क्रम में ग्रामीण जीवन के पिछड़ेपन दुख : दैन्य ,अभाव ,अज्ञान, अंधविश्वास के साथ तरह -तरह के सामाजिक शोषण के चक्र में फंसी हुई जनता की पीड़ाओं और संघर्ष से भी उसका साक्षात्कार होता है। “मैला आंचल” का कथा क्षेत्र मेरी गंज है जो नील की खेती से संबंध है।

 फणीश्वर नाथ की जीवनी:

फणीश्वर नाथ की जीव
फणीश्वर नाथ की जीवनी के बारे

फणीश्वर नाथ रेणु का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के अररिया जिले के औराही हिंगना गांव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा फारबिसगंज तथा अररिया में पूरी करने के बाद रेणु ने मेट्रिक नेपाल के विराट नगर आदर्श विद्यालय से कोईराला परिवार में रहकर की ।उसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट काशी हिंदू विश्वविद्यालय से 1942 में की। उसके बाद वह स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। इसके बाद इन्होंने 1950 ईस्वी में नेपाली क्रांतिकारी आंदोलन में भी हिस्सा लिया जिसके परिणाम स्वरूप नेपाल में जनतंत्र की स्थापना हुई ।पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ छात्र संघर्ष समिति में भी इन्होंने हिस्सा लिया और जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति में अहम भूमिका निभाई ।इसके बाद वे रोग से ग्रस्त रह रहे थे उसी दौरान लेखन की ओर इनका झुकाव हुआ फणीश्वर नाथ रेणु के कई उपन्यास ,कथा संग्रह ,रिपोर्ताज और कहानियां प्रकाशित हुए हैं। जिसमें सबसे ज्यादा प्रसिद्ध उपन्यास उनका “मैला आंचल” है।

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