एविएशन में भारतीय महिलाएं, ‘छोटे शहरों की लड़कियां अब बड़े सपने देख रही हैं’
इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ वूमेन एयरलाइन पायलट्स के अनुसार, विश्व स्तर पर इस क्षेत्र में भारत महिलाओं का अनुपात सबसे अधिक है।
एक रिपोर्ट मुताबिक भारत में महिला पायलटों की संख्या 12 फीसदी से ज्यादा है और यह अनुपात दुनिया के सबसे बड़े एविएशन सेक्टर अमेरिका के मुकाबले दोगुना है।
लगभग छह साल पहले जब हिना मोहसिन खान ने करियर बदलने और पायलट बनने का फैसला किया, तो उन्होंने एक पुरुष-प्रभुत्व वाले क्षेत्र में कदम रखा, जहां महिलाएं अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं।
अपने रिश्तेदारों के नाराज़ होने के बावजूद, वह आगे बढ़ीं और 33 वर्षीय हिना खान अब भारत में 1,000 से अधिक महिला पायलटों में से एक हैं।
हिना मोहसिन खान ने कहा
कि वह मीडिया और इवेंट मैनेजमेंट की फील्ड से जुड़ी रही हैं.
उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और कस्बों की लड़कियां अब बड़े सपने देख रही हैं और पायलट बनने की ख्वाहिश रखती हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा 2022 ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में 146 देशों में से 135वें स्थान पर होने के बावजूद भारत ने एविएशन इंडस्ट्री में लैंगिक समानता में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं।
हिना खान ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के इतिहास के बावजूद एविएशन इंडस्ट्री में महिलाओं का प्रतिनिधित्व नई पीढ़ी के लिए एक अलग संदेश है।
सफलता मिलने के बाद जब वह देश भर की लड़कियों से संपर्क करती हैं
और जब उन्हें यह प्रतिक्रिया मिलती है कि आप हमारी आदर्श हैं, तो मुझे इस क्षेत्र में आकर जितना चाहिए था, उससे कहीं अधिक मिलने का एहसास होता है।
दूसरी ओर, फ्लाइंग एकेडमी इंडिया के संचालन निदेशक सुरेश कुमार इलांगवोन ने कहा कि सरकारी प्रोत्साहन और अन्य छात्रवृत्ति ने भी भारत में महिलाओं को पेशेवर पायलट बनने का साहस और प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
सुरेश कुमार ने कहा कि वर्तमान में हमारे पास इस क्षेत्र में आने वाले छात्रों में 70% महिलाएं हैं और महिलाओं को एयरलाइन उद्योग में अधिक विशेषाधिकार भी मिल रहे हैं।
एलंगोवन ने कहा कि फ्लाइंग अकादमियों में
कई उम्मीदवार ग्रामीण क्षेत्रों से भी आते हैं, हमारी नई पीढ़ी आशावादी है और अज्ञात स्थलों की तलाश में है। साथ ही ध्वज वाहक एयर इंडिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक जितेंद्र भार्गव का कहना है कि भारत में महिला पायलटों की भर्ती का एक लंबा इतिहास रहा है और आज ये प्रयास रंग ला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 80 के दशक में जब सार्वजनिक पायलट प्रशिक्षण संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी की स्थापना की गई थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने लड़कियों के लिए कुछ सीटें आरक्षित की थीं, जिसके बाद निजी क्षेत्र में यह प्रवृत्ति बढ़ती चली गई।
भार्गव ने कहा कि हमारी महिला पायलटों की बेटियों ने भी अब इसी क्षेत्र को चुनने और इसे अपना करियर बनाने पर ध्यान दिया है जिसके कारन भारत में महिलाओ का सम्मान और भी बढ़ रहा है।





